युवती नायिकाएँ अपने प्रेमी युवकों को सामने से नहीं देखतीं, और नायक के द्वारा देखे जाने पर अर्थात् आँखें मिल जाने पर लज्जा से आँखें नीचे कर लेती हैं। किंतु अपने प्रेमी नायक को अपने अंगों को (स्तनादि अंगों को) किसी-न-किसी बहाने दिखा देती हैं। यदि नायक असावधान, अकेला दूर हो तो वह उसे बार-बार देखती है।