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वात्स्यायन के उद्धरण

युवती कन्या; वर-प्राप्ति के लिए उपाय करती हुई जिस नायक को आश्रय के योग्य, रतिसुख का हेतु, अपने अनुकूल एवं वशीभूत समझे—उस नायक का वरण कर ले।