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विश्वनाथ त्रिपाठी के उद्धरण

युग विशिष्ट में अनुभूति की अभिव्यक्ति किसी प्रचलित प्रवृत्ति का सहारा लेती है। यह प्रवृत्ति किसी साहित्येतर आंदोलन पर आधारित हो सकती है, या किसी शुद्ध साहित्यिक प्रवृत्ति पर भी।