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हरिशंकर परसाई के उद्धरण

यश का उन्माद बहुत बुरा होता है। नार्मल यशोकामना रहे और नार्मल तरीक़े से यश मिले तो ठीक है। सब यश चाहते हैं, मगर कुछ लोग ज़्यादा उस्ताद होते हैं। वे जानते हैं कि साधारण तरीक़े से हमारा सीमित यश फैलेगा, इसलिए वे ऐसे तरीक़े अपनाते हैं, जिनसे उनकी हँसी उड़े।