यदि युवक और युवती परस्पर एक-दूसरे से प्रेम करते हों और परस्पर विवाह करना चाहते हों; किन्तु सामाजिक बंधनों के कारण तथा गुणहीन, धनहीन, कुलहीन एवं माता-पिता और भाइयों के परतंत्र होने के कारण, युवती से शास्त्रविधि से विवाह करने में असमर्थ हों, तो उन्हें चाहिए कि वह गांधर्व विधि से विवाह कर लें।