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वात्स्यायन के उद्धरण

यदि राग (प्रेम) के आयतन अर्थात रूप, यौवन और गुण को याद दिलाने वाला नखक्षत; नायिका के शरीर पर विद्यमान न हो, तो बहुत दिनों से प्रेम संबंध के छूट जाने पर प्रीति पराजित हो जाती है अर्थात् नष्ट हो जाती है।