यदि तुम ईसाई होना चाहते हो, तो यह जानना आवश्यक नहीं कि ईसा मसीह कहाँ पैदा हुए थे—जेरूसलम में या बेथलेहम में, अथवा उन्होंने ‘पर्वत पर का उपदेश’ ठीक किस तारीख़ को सुनाया था। तुम्हें तो केवल उस ‘पर्वत पर के उपदेश’ के अनुभव करने की आवश्यकता है। यह उपदेश किस समय दिया गया, इस विषय में दो हज़ार शब्द पढ़ने की ज़रूरत नहीं।
अनुवाद :
पण्डित द्वारकानाथ तिवारी