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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

यदि इच्छा न रहे, तो दुःख भी नहीं होगा। यहाँ भी मुझे ग़लत समझ लेने की आशंका है, अतः यह स्पष्ट कर देना आवश्यक है कि वासनाओं, इच्छाओं के त्याग तथा समस्त दुःख से मुक्त हो जाने से मेरा आशय क्या है। दीवार में कोई वासना नहीं है, वह कभी दुःख नहीं भोगती। ठीक है, पर वह कभी उन्नति भी तो नहीं करती।