Font by Mehr Nastaliq Web

कुँवर नारायण के उद्धरण

यदि चलताऊ क़िस्म के साहित्य की माँग और प्रचार अधिक है, तो उससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि दूसरे क़िस्म का साहित्य असामाजिक और ऐकांतिक है, बल्कि यह कि जनसाधारण का स्तर प्रौढ़ता का स्तर नहीं। ऐसी दशा में साधारणीकरण या शायद निम्नस्तरीकरण पर अधिक ज़ोर देना, प्रौढ़ एवं गंभीर साहित्य की संभावनाओं को कुंठित करना होगा।