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विनोबा भावे के उद्धरण

व्याकरण में कहा गया है कि एकः शब्दः सम्यक् ज्ञातः सम्यक् संयुक्तः स्वर्गलोक कामधुम् भवति—एक भी शब्द का अगर सम्यक् ज्ञान हो और उसका सम्यक् प्रयोग हम करते हों, तो वह स्वर्गलोक में कामधेनु बनता है।