श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण
विश्वास-क्षेत्र बड़ा ही उर्वर है। सावधान! अविश्वासरूपी जंगल झाड़ के संदेहरूपी अंकुर निकलते देखते ही तत्क्षण उसे उखाड़ फेंको, नहीं तो भक्तिरूपी अमृत वृक्ष बढ़ नहीं सकेगा।
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