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दुर्गा भागवत के उद्धरण

विचारक कहते हैं कि मृत्यु भयकारी नहीं, किंतु आनंद-पर्यवसायी मृत्यु का उदाहरण बहुत ही दुर्लभ है।

अनुवाद : वासंतिका पुणतांबेकर