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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

वेदों में जो कर्मवाद है, वही यहूदी तथा अन्य धर्मों में भी है अर्थात् यज्ञ तथा अन्य बाह्य आचरणों द्वारा अंतःकरण की शुद्धि। इसका विरोध सबसे पहले भगवान् बुद्ध ने ही किया।