वर्तमान युग की पेचीदा समस्याओं को प्राचीन पद्धतियों और सूत्रों का प्रयोग कर समझने का प्रयत्न करना, और उनके बारे में बीते हुए ज़माने की भाषा का प्रयोग करना—उलझन पैदा करना और असफलता को निमंत्रित करना है; क्योंकि उस ज़माने में ये समस्याएँ पैदा ही नहीं हुई थीं।