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स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण

त्याग, अप्रतिरोध, अहिंसा के आदर्शों को, सांसारिकता, प्रतिरोध और हिंसा की प्रवृत्तियों को निरंतर कम करते रहने से प्राप्त किया जा सकता है।