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श्री श्रीठाकुर अनुकूलचन्द्र के उद्धरण

थोड़ा रो लेने से ही या नृत्य-गीतादि में उत्तेजित होकर; उछल-कूद करने से ही जो भक्ति हुई, ऐसी बात नहीं है। सामयिक भावोन्मत्ततादि भक्त के लक्षण नहीं। भक्त के चरित्र में पत्तला अहंकार का चिन्ह, विश्वास का चिन्ह, सत्-चिंता का चिन्ह सदव्यवहार का चिन्ह एवं उदारता इत्यादि के चिन्ह कुछ-न-कुछ रहेंगे ही, नहीं तो भक्ति नहीं आई।

अनुवाद : श्रीरामनंदन प्रसाद