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महादेवी वर्मा के उद्धरण

ठंडे जल के पात्र के पास रखा हुआ उष्ण जल का पात्र; जैसे अनजानें में ही उसकी शीतलता ले लेता है, उसी प्रकार चुपचाप शिक्षित महिला-समाज ने, पुरुष-समाज की दुर्बलताएँ आत्मसात् कर ली हैं और अब वे उनकी दुरवस्था में ही चरम सफलता की प्रतिच्छाया देखने लगी हैं।