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भर्तृहरि के उद्धरण

तप्त लोहे पर जल की बूँद पड़ने से उसका नाम भी नहीं रहता है, वही बूँद कमल के पत्र पर पड़ने से मोती के सदृश शोभित होता है, फिर वही बूँद स्वाती नक्षत्र में समुद्र की सीप में मोती हो जाता है, इससे यह सिद्ध हुआ कि प्रायः अधम, मध्यम और उत्तम गुण संसर्ग से ही होते हैं।