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आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

सूर का संयोगवर्णन एक क्षणिक घटना नहीं है; प्रेम, संगीतमय जीवन की एक गहरी चलती धारा है, जिसमें अवगाहन करनेवाले दिव्य माधुर्य के अतिरिक्त और कहीं कुछ नहीं दिखाई पड़ता।