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भर्तृहरि के उद्धरण

सुख के समय थोड़ा-थोड़ा आँखों को बंद कर, जो सुख का अनुभव दो युवा प्रेमियों को होता है—वह वास्तव में कामदेव का पुरुषार्थ है।