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विक्टर ई. फ्रैंकल के उद्धरण

स्पिनोज़ा ने अपने 'एथिक्स' में कहा है : 'जो भी भाव हमारे लिए कष्ट का कारण बन रहा हो; अगर हम उसके प्रति एक स्पष्ट और सटीक भाव विकसित कर लें तो उसका कष्ट उसी समय समाप्त हो जाता है।'

अनुवाद : रचना भोला 'यामिनी'