श्रीमद् राजचंद्र के उद्धरण
ईश्वर को कर्म का फल देने वाला माना जाये तो भोक्तापना सिद्ध होता है। परंतु ऐसा कहने से तो ईश्वर का ईश्वरपना ही छूट जाता है।
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