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महादेवी वर्मा के उद्धरण

शिक्षा एक ऐसा कर्त्तव्य नहीं है; जो किसी पुस्तक को प्रथम पृष्ठ से अंतिम पृष्ठ तक पढ़ा देने से ही पूर्ण हो जाता हो, वरन् वह ऐसा कर्तव्य है; जिसकी परिधि सारे जीवन को घेरे हुए है और पुस्तकें ऐसे साँचे हैं, जिनमें ढालकर उसे सुडौल बनाया जा सकता है।