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महात्मा गांधी के उद्धरण

शरीर के अधिक निर्मल होने से स्वाद बढ़ गया, भूख अधिक खुल गई और मैंने देखा कि उपवास आदि जिस हद तक संयम के साधन हैं—उस हद तक वे भोग के साधन भी बन सकते हैं।