स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण
शरीर कभी आत्मा नहीं हो सकता, क्योंकि वह बुद्धियुक्त नहीं है। शव अथवा कसाई की दूकान का मांस का टुकड़ा कभी बुद्धियुक्त नहीं है। हम ‘बुद्धि’ शब्द से क्या समझते हैं? प्रतिक्रिया-शक्ति।
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