स्वामी विवेकानन्द के उद्धरण
सत्य की तुलना मैं एक अनंत शक्तिवाले क्षयकर पदार्थ से करूँगा। वह जहाँ भी गिरता है, जलाकर अपना स्थान बना लेता है। यदि नरम वस्तु पर गिरे तो तुरंत और अगर कठोर पाषाण हो तो धीरे-धीरे, परंतु जलता वह अवश्य है।
-
संबंधित विषय : सच