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श्यामाचरण दुबे के उद्धरण

सत्ता को संस्कृति से अलग नहीं रखा जा सकता, प्रयत्न यह होना चाहिए कि वह अपने हस्तक्षेप की मर्यादाएँ स्वयं निर्धारित करे और उनका सम्मान करे।