सरल प्रकृति की नायिका, नायक से मिलन के पूर्व ही भावसूचक आकार को प्रदर्शित कर देती है। एकांत में अपने अंगों का प्रदर्शन करती है, कंपन-युक्त गद्गद आवाज़ में बोलती है। हाथ-पैर की अँगुलियों और मुँह पर पसीना आ जाता है। नायक के शिर, पैर आदि दबाने में दिलचस्पी रखती है।