Font by Mehr Nastaliq Web

वात्स्यायन के उद्धरण

सरल प्रकृति की नायिका, नायक से मिलन के पूर्व ही भावसूचक आकार को प्रदर्शित कर देती है। एकांत में अपने अंगों का प्रदर्शन करती है, कंपन-युक्त गद्गद आवाज़ में बोलती है। हाथ-पैर की अँगुलियों और मुँह पर पसीना आ जाता है। नायक के शिर, पैर आदि दबाने में दिलचस्पी रखती है।