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वात्स्यायन के उद्धरण

समीप में सोई हुई नायिका के ऊपर सोया हुआ-सा नायक हाथ रखे और वह नायिका नींद में सोई हुई के समान कुछ परवाह नहीं करती हो अर्थात् उसके हाथ को नहीं हटाती, किंतु फिर मिलने की अधिक इच्छा रखने वाली वह नायिका, जागने का बहाना कर के नायक के हाथ को हटा देती है।