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नामवर सिंह के उद्धरण

सपना तो प्रयोगवादी कवि भी देखता है; लेकिन उसका दिवास्वप्न प्रायः रुग्णता और पलायन के भावों से भरा होता है, जब कि प्रगतिशील कवि का सपना उसे संघर्ष करने की शक्ति देता है—वह स्फूर्तिदायक और वीरत्व-व्यंजक होता है।