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श्याम मनोहर के उद्धरण

समकालीन भारतीय यथार्थ, जिसे मैं सभ्यता (सिविलिजेशन) कहता हूँ—से शुरू होकर साहित्य का संस्कृति तक पहुँचना—कथा-साहित्य को पर्याप्तता प्रदान करता है।

अनुवाद : निशिकांत ठकार