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श्याम मनोहर के उद्धरण

सभ्यता का कथा-साहित्य कालबाह्य हो सकता है, संस्कृति का कथा-साहित्य कभी कालबाह्य नहीं होता—वह अभिजात होता है।

अनुवाद : निशिकांत ठकार