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विनोबा भावे के उद्धरण

साहित्य में हृदय-प्रवेश करने की जो अप्रत्यक्ष शक्ति है, वह है मधुरता में, मार्दव में, अहिंसा में, नम्रता में और प्रत्यक्ष शक्ति है, सत्य में। सत्य और अहिंसा के बिना वाणी समर्थ साबित नहीं होगी।