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विनोबा भावे के उद्धरण

सगुण उपासना अपनी-अपनी शक्ति के अनुसार अनेक प्रकार से की जा सकती है। उस छोटे से देहात की—जहाँ हमारा जन्म हुआ—सेवा करना अथवा माँ-बाप की सेवा करना सगुण-पूजा है।