अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण
रूप क्या है यह तो किसी को समझना नहीं पड़ता है, नज़र में पड़ते ही रूप यह बता देता है कि मैं क्या चीज़ हूँ।
-
संबंधित विषय : सौंदर्य