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अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

राष्ट्र की फूँक से राष्ट्रीयता का गौरव तो जल उठता है, किंतु फूलों का मुख नहीं खुलता है। राष्ट्र का बनाया हुआ है नेशनल पार्क—उसमें भी फूँक मारने से फूल नहीं खिलते हैं।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी