Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

रसविधायक कवि का काम श्रोता या पाठक में भावसंचार करना नहीं, उसके समक्ष भाव का रूप प्रदर्शित करना है, जिसके दर्शन से श्रोता के हृदय में भी उक्त भाव की अनुभूति होती है, जो प्रत्येक दशा में आनंदस्वरूप ही रहता है।