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वात्स्यायन के उद्धरण

रागवत्, आहार्यराग, कृत्रिमराग, व्यवहितराग, पोटारत, खलरत और अयंत्रित रत—ये सात प्रकार के रत-विशेष अर्थात अनुराग के प्रकार हैं।