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वात्स्यायन के उद्धरण

रागवश अर्थात् राग के बढ़ जाने से; कामवश लोग देशाचार के अनुसार विभिन्न अंग-स्थानों का चुम्बन करते हैं, किंतु सभी लोगों को उनका प्रयोग नहीं करना चाहिए।