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वात्स्यायन के उद्धरण

प्रेयसी नायिका को प्राप्त करने के लिए, नायक को बाह्य उपायों के बाद आभ्यंतर उपायों का प्रयोग करना चाहिए। नायक को चाहिए कि वह नायिका के पैर धोते समय; उसके पैर की अँगुलियों को अपने पैर की अँगुलियों से दबाए, कोई वस्तु लेते-देते समय नाख़ून से उस पर निशान बना दे, हाथ-मुख धोने से बचे हुए जल से नायिका के ऊपर छींटा मारे, एकांत अथवा अँधेरे में एक साथ; एक आसन पर सटकर बैठे हुए नखक्षत करे या चिकोटी काटे और अपने प्रेम-भाव को प्रकट करे। फिर 'मैं तुमसे एकांत में कुछ कहना चाहता हूँ' ऐसा कहकर नायिका के मनाभावों को समझने का प्रयास करे।