Font by Mehr Nastaliq Web

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के उद्धरण

प्रबंधक्षेत्र में तुलसीदासजी का जो सर्वोच्च आसन है, उसका कारण यह है कि वीरता, प्रेम आदि जीवन का कोई एक ही पक्ष न लेकर, उन्होंने संपूर्ण जीवन को लिया है और उसके भीतर आनेवाली अनेक दशाओं के प्रति अपनी गहरी अनुभूति का परिचय दिया है।