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श्यामाचरण दुबे के उद्धरण

परंपरा जीवन-दृष्टि, मूल्यों, विचार-प्रकारों, आचार, प्रथाओं और सम्बद्ध सामाजिक क्रियाओं की ऐसी समग्रता है, जिसकी निरंतरता पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनी रहती है।