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अवनींद्रनाथ ठाकुर के उद्धरण

निश्चय ही आजकल हमारी जीवन-यात्रा को कहीं कोई मशीन बिगाड़ गई है, जिससे हमारा जीवन व्यर्थ और बेढंगे के रूप में लँगड़ाकर चल रहा है।

अनुवाद : रामशंकर द्विवेदी