निराशवादी आदमी अपनी दीवार पर लगे उस कैलेंडर को भय और उदासी के साथ देखता है, जो दिन-ब-दिन पन्ने फाड़े जाने के कारण पतला होता जा रहा है और उम्र बीतने का प्रतीक है। वही दूसरी ओर; जीवन की समस्याओं पर सक्रिय रूप से धावा बोलने वाला व्यक्ति, अपनी दीवार पर लगे कैलेंडर के पुराने पन्ने फाड़ता है। लेकिन वह उनके पीछे अपने अनुभव से जुड़े कुछ नोट्स लिखकर उन्हें कहीं सँभालकर रख देता है।
अनुवाद :
रचना भोला 'यामिनी'