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वात्स्यायन के उद्धरण

जब नायक-नायिका एक-दूजे से अत्यधिक परिचित न हुए हों, ऐसे में नायिका जब एकांत में अपने प्रेमी को खड़ा हुआ या बैठा हुआ देखे, तो किसी वस्तु को लेने के बहाने उसे अपने स्तनों से नायक को स्पर्श करने की कोशिश करनी चाहिए और नायक को भी उसका अच्छी तरह आलिंगन करना चाहिए। इस तरह का आलिंगन 'विद्धक आलिंगन' कहलाता है।