नायिका जब एक पैर से नायक के पैर को दबाते हुए, दूसरे पैर से उसकी जंघाओं को संपीडित करे और एक बाँह से उसकी पीठ का आलिंगन करती हुई, दूसरी बाँह से उसके कंधे को झुकाकर; मंद सीत्कार के साथ उसके मुख को चूमने के लिए उस पर चढ़ने का प्रयत्न करती है—तब उस आलिंगन को ‘वृक्षाधिरूढ़क’ कहा जाता है।