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वात्स्यायन के उद्धरण

नायक द्वारा नायिका की प्रकृति के अनुकूल, देशाचार के अनुकूल तथा नायिका की अभिरुचि से पशु-पक्षियों के भावों के अनुसार, रतिक्रीड़ा का प्रयोग किए जाने पर—नायक के प्रति नायिका का स्नेह, अनुराग और सम्मान बढ़ता है।