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वात्स्यायन के उद्धरण

नायक जब निरंतर संभोग के श्रम से थककर शिथिल हो जाए और वीर्य-स्खलन न होने से उसका जोश समाप्त नहीं हो, तो नायक की अनुमति से उसे नीचे लेटाकर, उसके ऊपर स्वयं लेटकर नायिका को संभोग को और प्रगाढ़ बनाना चाहिए।