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वात्स्यायन के उद्धरण

नागरक अन्तःपुर में आने-जाने वाली किसी परिचारिका को अपने पर आसक्त समझ लेने पर, उस पर दृढ़ आसक्ति प्रकट करे और उसके न मिलने पर शोक प्रकट करे; तथा इसी प्रकार अन्य अन्तःपुरिका दासियों से संबंध स्थापित कर, उनसे दूती का काम ले।