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महादेवी वर्मा के उद्धरण

मेरे लिए तो मनुष्य एक सजीव कविता है। कवि की कृति सजीव कविता का शब्दचित्र मात्र है, जिससे उसका व्यक्तित्व और संसार के साथ उसकी एकता जानी जाती है। वह एक संसार में रहता है और उसने अपने भीतर एक और इस संसार से अधिक सुंदर, अधिक सुकुमार, संसार बसा रखा है।